सामान्य सप्ताह

धन्य जुनिपेरो सेरा, पुरोहित, धर्मसंघी एवं मिशनरी

📒 पहला पाठ: आमोस 5:14-15,21-24

14 बुराई की नहीं, बल्कि भलाई की खोज में लगे रहो। इस प्रकार तुम्हें जीवन प्राप्त होगा और विश्वमण्डल का प्रभु-ईश्वर तुम्हारे साथ होगा, जैसा कि तुम उसके विषय में कहते हो।

15 बुराई से बैर करो, भलाई से प्रेम रखो और अदालत में न्याय बनाये रखो। तब हो सकता है कि विश्वमण्डल के प्रभु-ईश्वर यूसुफ़ के बचे हुए लोगों पर दया करे।

21 “मैं तुम्हारे पर्वों से बैर और घृणा करता हूँ। तुम्हारे धार्मिक समारोह मुझे नहीं सुहाते।

22 मैं तुम्हारे होम और नैवेद्य स्वीकार नहीं करता और तुम्हारे द्वारा चढाये हुए मोटे पशुओं के शांति-बलिदानों की ओर नहीं देखता।

23 अपने गीतों को कोलाहल मुझ से दूर करो। मैं तुम्हारी सारंगियों की आवाज़ सुनना नहीं चाहता।

24 न्याय नदी की तरह बहता रहे और धर्मिकता कभी न सूखने वाली धारा की तरह।


📘 सुसमाचार :
मत्ती 8:28-34

28 जब ईसा समुद्र के उस पार गदरेनियों के प्रदेश पहुँचे, तो दो अपदूतग्रस्त मनुष्य मक़बरों से निकल कर उनके पास आये। वे इतने उग्र थे कि उस रास्ते से कोई भी आ-जा नहीं सकता था।

29 वे चिल्ला उठे, ”ईश्वर के पुत्र! हम से आप को क्या? क्या आप यहाँ समय से पहले हमें सताने आये हैं?”

30 वहाँ कुछ दूरी पर सुअरों का एक बड़ा झुण्ड चर रहा था।

31 अपदूत यह कहते हुए अनुनय-विनय करते रहे, ”यदि आप हम को निकाल ही रहे हैं, तो हमें सूअरों के झुण्ड में भेज दीजिए”।

32 ईसा ने उन से कहा, ”जाओ”। तब अपदूत उन मनुष्यों से निकल कर सूअरों में जा घुसे और सारा झुण्ड तेज़ी से ढाल पर से समुद्र में कूद पड़ा और पानी में डूब कर मर गया।

33 सूअर चराने वाले भाग गये और जा कर पूरा समाचार और अपदूतग्रस्तों के साथ जो कुछ हुआ, यह सब उन्होंने नगर में सुनाया।

34 इस पर सारा नगर ईसा से मिलने निकला और उन्हें देख कर लोगों ने निवेदन किया कि वह उनके प्रदेश से चले जायें।