ग्वाडालूपे की धन्य कुँवारी मरियम का पर्व

📒 पहला पाठ: ज़कारिया 2: 14-17

14 प्रभु कहता है, “सियोन की पुत्री! आनन्द का गीत गा, क्योंकि मैं तेरे यहाँ निवास करने आ रहा हूँ।

15 उस दिन बहुत-से राष्ट्र प्रभु के पास आयेंगे। वे उसकी प्रजा बनेंगे, किन्तु वह तेरे यहाँ निवास करेगा“ और तू जान जायेगी कि विश्वमण्डल के प्रभु ने मुझे तेरे पास भेजा है।

16 तब प्रभु पुण्य भूमि में यूदा को फिर अपनी प्रजा बनायेगा और येरूसालेम को फिर अपनायेगा।

17 समस्त मानवजाति प्रभु के सामने मौन रहे। वह जाग कर अपने पवित्र निवास से आ रहा है।


📘 सुसमाचार : लूकस 1: 39-47

39 उन दिनों मरियम पहाड़ी प्रदेश में यूदा के एक नगर के लिए शीघ्रता से चल पड़ी।

40 उसने ज़करियस के घर में प्रवेश कर एलीज़बेथ का अभिवादन किया।

41 ज्यों ही एलीज़बेथ ने मरियम का अभिवादन सुना, बच्चा उसके गर्भ में उछल पड़ा और एलीज़बेथ पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गयी।

42 वह ऊँचे स्वर से बोल उठी, “आप नारियों में धन्य हैं और धन्य है आपके गर्भ का फल!

43 मुझे यह सौभाग्य कैसे प्राप्त हुआ कि मेरे प्रभु की माता मेरे पास आयीं?

44 क्योंकि देखिए, ज्यों ही आपका प्रणाम मेरे कानों में पड़ा, बच्चा मेरे गर्भ में आनन्द के मारे उछल पड़ा।

45 और धन्य हैं आप, जिन्होंने यह विश्वास किया कि प्रभु ने आप से जो कहा, वह पूरा हो जायेगा!”

46 तब मरियम बोल उठी, “मेरी आत्मा प्रभु का गुणगान करती है,

47 मेरा मन अपने मुक्तिदाता ईश्वर में आनन्द मनाता है;