पवित्र क्रूस की महिमा का पर्व
📒 पहला पाठ:गणना ग्रन्थ 21:4-9
4 होर पर्वत से वे एदोमियों के देश के किनारे-किनारे चल कर लाल समुद्र की ओर आगे बढ़े। यात्रा करते-करते लोगों का धैर्य टूट गया
5 और वे यह कहते हुए ईश्वर और मूसा के विरुद्ध भुनभुनाने लगे, ”आप हमें मिस्र देश से निकाल कर यहाँ मरुभूमि में मरने के लिए क्यों ले आये हैं? यहाँ न तो रोटी मिलती है और न पानी। हम इस रूखे-सूखे भोजन से ऊब गये हैं।”
6 प्रभु ने लोगों के बीच विषैले साँप भेजे और उनके दंश से बहुत-से इस्राएली मर गये।
7 तब लोग मूसा के पास आये और बोले, ”हमने पाप किया। हम प्रभु के विरुद्ध और आपके विरुद्ध भुनभुनाये। प्रभु से प्रार्थना कीजिए कि वह हमारे बीच से साँपों को हटा दे।” मूसा ने जनता के लिए प्रभु से प्रार्थना की
8 और प्रभु ने मूसा से कहा, ”काँसे का साँप बनवाओ और उसे डण्डे पर लगाओ। जो साँप द्वारा काटा गया, वह उसकी ओर दृष्टि डाले और वह अच्छा हो जायेगा।”
9 मूसा ने काँसे का साँप बनवाया और उसे डण्डे पर लगा दिया। जब किसी को साँप काटता था, तो वह काँसे के साँप की ओर दृष्टि डाल कर अच्छा हो जाता था।
📘 सुसमाचार : लूकस 3:13-17
13 वह उन से कहता था, “जितना तुम्हारे लिये नियत है, उस से अधिक मत माँगों”।
14 सैनिक भी उस से पूछते थे, “और हमें क्या करना चाहिए?” वह उन से कहता था, “किसी पर अत्याचार मत करो, किसी पर झूठा दोष मत लगाओ और अपने वेतन से सन्तुष्ट रहो”।
15 जनता में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी और योहन के विषय में सब मन-ही-मन सोच रहे थे कि कहीं यही तो मसीह नहीं है।
16 इसलिए योहन ने सबों से कहा, “मैं तो तुम लोगों को जल से बपतिस्मा देता हूँ; परन्तु एक आने वाले हैं, जो मुझ से अधिक शक्तिशाली हैं। मैं उनके जूते का फ़ीता खोलने योग्य नहीं हूँ। वह तुम लोगों को पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देंगे।
17 वह हाथ में सूप ले चुके हैं, जिससे वह अपना खलिहान ओसा कर साफ़ करें और अपना गेहूँ अपने बखार में जमा करें। वह भूसी को न बुझने वाली आग में जला देंगें।”
