तैंतीसवाँ सामान्य सप्ताह
आज के संत: संत पेत्रुस एवं पौलुस के महामंदिर का प्रतिष्ठान
📒पहला पाठ- 2 मक्काबियों 6:18-31
18 एलआजा़र मुख्य शास्त्रियों में एक था। वह बहुत बूढ़ा हो चला था और उसकी आकृति भव्य तथा प्रभावशाली थी। वह अपना मुँह खोलने और सूअर का मांस खाने के लिए बाध्य किया जा रहा था।
19 (19-20) किन्तु उसने कलंकित जीवन की अपेक्षा गौरवपूर्ण मृत्यु को चुना। वह सूअर का मांस उगल कर स्वेच्छा से उस स्थान की ओर बढ़ा जहाँ कोडे लगाये जाते थे। ऐसा उन लोगों को करना चाहिए, जिन्हें जीवन का मोह छोड़ कर वर्जित भोजन अस्वीकार करने का साहस हैं।
21 उस अवैध भोजन का प्रबन्ध करने वाले एलआजार के पुराने परिचित थे। उन्होंने उसे अलग ले जा कर उस से अनुरोध किया कि वे ऐसा माँस मँगवा कर खाये, जो वर्जित न हो और जिसे उसने स्वयं पकाया हो और राजा के आदेश के अनुसार बलि का माँस खाने का स्वाँग मात्र करे।
22 इस प्रकार वह मृत्यु से बच सकेगा और पुरानी मित्रता के कारण उसके साथ अच्छा व्यवहार किया जायेगा।
23 किन्तु उसने एक उत्तम निश्चय किया, जो उसकी उमर, उसकी वृद्धावस्था की मर्यादा, उसके सफेद बालों, बचपन से उसके निर्दोष आचरण और विशेष कर ईश्वर द्वारा प्रदत्त पवित्र नियमों के अनकूल था। उसने उत्तर दिया, “मुझे तुरन्त अधोलोक पहुँचा दो।
24 मेरी अवस्था में इस प्रकार का स्वाँग अनुचित है। कहीं ऐसा न हो कि बहुत-से युवक यह समझें कि एलआजा़र ने नब्बे वर्ष की उमर में विदेशियों के रीति-रिवाज अपनाये हैं।
25 मेरे जीवन का बहुत कम समय रह गया है। यदि मैं उसे बचाने के लिए इस प्रकार का स्वाँग करता, तो वे शायद मेरे कारण भटक जाते और मेरी वृद्धावस्था पर दोष और कलंक लग जाता।
26 यदि मैं इस प्रकार अभी मनुष्यों के दण्ड से बच जाता, तो भी, चाहे जीवित रहूँ अथवा मर जाऊँ, मैं सर्वशक्तिमान् के हाथ से नहीं छूट पाता।
27 इसलिए यदि मैं अभी साहस के साथ अपना जीवन अर्पित करूँगा तो मैं अपनी वृद्धावस्था की प्रतिष्ठा बनाये रखूँगा
28 और युवकों के लिए एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करूँगा कि किस प्रकार पूज्य तथा पवित्र विधियों की रक्षा के लिए कोई स्वेच्छा से और आनंद के साथ मर सकता है।” यह कह कर एलआजा़र सीधे उस स्थान की ओर बढ़ा जहाँ कोडे़ लगाये जाते थे।
29 जो पहले उसके साथ सहानुभूति दिखलाते थे, अब वे उसके साथ दुव्र्यवहार करने लगे; क्योंकि एलआजा़र ने उन से जो कहा था, वह उन्हें मूर्खता ही लगी।
30 कोड़ों की मार से मरते समय एलआजा़र ने आह भर कर यह कहा, “प्रभु सब कुछ जानता है। वह जानता है कि मैं मृत्यु से बच सकता था। मैं कोड़ों की मार से जो असह्î पीडा अपने शरीर में भोग रहा हूँ, उसे अपनी आत्मा से स्वेच्छा से स्वीकार करता हूँ, क्योंकि मैं उस पर श्रद्धा रखता हूँ”।
31 इस प्रकार वह मर गया और उसने मरते समय न केवल युवकों के लिए, बल्कि राष्ट्र के अधिकांश लोगों के लिए साहस तथा धैर्य का आदर्श प्रस्तुत किया।
📙सुसमाचार – लूकस 19: 1-10
1 ईसा येरीख़ो में प्रवेश कर आगे बढ़ रहे थे।
2 ज़केयुस नामक एक प्रमुख और धनी नाकेदार
3 यह देखना चाहता था कि ईसा कैसे हैं। परन्तु वह छोटे क़द का था, इसलिए वह भीड़ में उन्हें नहीं देख सका।
4 वह आगे दौड़ कर ईसा को देखने के लिए एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी रास्ते से आने वाले थे।
5 जब ईसा उस जगह पहुँचे, तो उन्होंने आँखें ऊपर उठा कर ज़केयुस से कहा, “ज़केयुस! जल्दी नीचे आओ, क्योंकि आज मुझे तुम्हारे यहाँ ठहरना है”।
6 उसने, तुरन्त उतर कर आनन्द के साथ अपने यहाँ ईसा का स्वागत किया।
7 इस पर सब लोग यह कहते हुए भुनभुनाते रहे, “वे एक पापी के यहाँ ठहरने गये”।
8 ज़केयुस ने दृढ़ता से प्रभु से कहा, “प्रभु! देखिए, मैं अपनी आधी सम्पत्ति ग़रीबों को दूँगा और मैंने जिन लोगों के साथ किसी बात में बेईमानी की है, उन्हें उसका चौगुना लौटा दूँगा”।
9 ईसा ने उस से कहा, “आज इस घर में मुक्ति का आगमन हुआ है, क्योंकि यह भी इब्राहीम का बेटा है।
10 जो खो गया था, मानव पुत्र उसी को खोजने और बचाने आया है।”