आज के संत: संत फेबियन (पोप और शहीद) / संत सेबेस्टियन (शहीद)
📒पहला पाठ: 1 समूएल 16: 1-13
1 प्रभु ने समूएल से कहा, “तुम कब तक उस साऊल के कारण शोक मनाते रहोगे, जिसे मैंने इस्राएल के राजा के रूप में अस्वीकार किया है? तुम सींग में तेल भर कर जाओ। मैं तुम्हें बेथलेहेम-निवासी यिशय के यहाँ भेजता हूँ, क्योंकि मैंने उसके पुत्रों में एक को राजा चुना है।”
2 समूएल ने यह उत्तर दिया, “मैं कैसे जा सकता हूँ? साऊल को इसका पता चलेगा और वह मुझे मार डालेगा।” इस पर प्रभु ने कहा, “अपने साथ एक कलोर ले जाओ और यह कहो कि मैं प्रभु को बलि चढ़ाने आया हूँ।
3 यज्ञ के लिए यिशय को निमन्त्रण दो। मैं बाद में तुम्हें बताऊँगा कि तुम्हें क्या करना है- मैं जिसे तुम्हें दिखाऊँगा, उसी को मेरी ओर से अभिषेक करोगे।”
4 प्रभु ने जो कहा था, समूएल ने वही किया। जब वह बेथलेहेम पहुँचा, तो नगर के अधिकारी घबरा कर उसके पास दौडे़ आये और बोले, “कैसे पधारे? कुशल तो है?”
5 समूएल ने कहा, “सब कुशल है। मैं प्रभु को बलि चढ़ाने आया हूँ। अपने को शुद्ध करो और मेरे साथ बलि चढ़ाने आओ।” उसने यिशय और उसके पुत्रों को शुद्ध किया और उन्हें यज्ञ के लिए निमन्त्रण दिया।
6 जब वे आये और समूएल ने एलीआब को देखा, तो वह यह सोचने लगा कि निश्चय ही यही ईश्वर का अभिषिक्त है।
7 परन्तु ईश्वर ने समूएल से कहा, “उसके रूप-रंग और लम्बे क़द का ध्यान न रखो। मैं उसे नहीं चाहता। प्रभु मनुष्य की तरह विचार नहीं करता। मनुष्य तो बाहरी रूप-रंग देखता है, किन्तु प्रभु हृदय देखता है।”
8 यिशय ने अबीनादाब को बुला कर उसे समूएल के सामने उपस्थित किया। समूएल ने कहा, “प्रभु ने उसे को भी नहीं चुना।”
9 तब यिशय ने शम्मा को उपस्थित किया, किन्तु समूएल ने कहा, “प्रभु ने उस को भी नहीं चुना।”
10 इस प्रकार यिशय ने अपने सात पुत्रों को समूएल के सामने उपस्थित किया। किन्तु समूएल ने यिशय से कहा, “प्रभु ने उन में किसी को भी नहीं चुना।”
11 उसने यिशय से पूछा, “क्या तुम्हारे पुत्र इतने ही है? “यिशय ने उत्तर दिया, “सब से छोटा यहाँ नहीं है। वह भेडे़ चरा रहा है।” तब समूएल ने यिशय से कहा, “उसे बुला भेजो। जब तक वह नहीं आयेगा, हम भोजन पर नहीं बैठेंगे।”
12 इसलिए यिशय ने उसे बुला भेजा। लड़के का रंग गुलाबी, उसकी आँखें सुन्दर और उसका शरीर सुडौल था। ईश्वर ने समूएल से कहा, “उठो, इसका अभिषेक करो। यह वही है।”
13 समूएल ने तेल का सींग हाथ में ले लिया और उसके भाइयों के सामने उसका अभिषेक किया। ईश्वर का आत्मा दाऊद पर छा गया और उसी दिन से उसके साथ विद्यमान रहा। समूएल लौट कर रामा चल दिया।
📘सुसमाचार : मारकुस 2: 23-28
23 ईसा किसी विश्राम के दिन गेहूँ के खे़तों से हो कर जा रहे थे। उनके शिष्य राह चलते बालें तोड़ने लगे।
24 फ़रीसियों ने ईसा से कहा, “देखिए, जो काम विश्राम के दिन मना है, ये क्यों वही कर रहे हैं?”
25 ईसा ने उन्हें उत्तर दिया, “क्या तुम लोगों ने कभी यह नहीं पढ़ा कि जब दाऊद और उनके साथी भूखे थे और खाने को उनके पास कुछ नहीं था, तो दाऊद ने क्या किया था?
26 उन्होंने महायाजक अबियाथार के समय ईश-मन्दिर में प्रवेश कर भेंट की रोटियाँ खायीं और अपने साथियों को भी खिलायीं। याजकों को छोड़ किसी और को उन्हें खाने की आज्ञा तो नहीं थी।”
27 ईसा ने उन से कहा, “विश्राम-दिवस मनुष्य के लिए बना है, न कि मनुष्य विश्राम-दिवस के लिए।
28 इसलिए मानव पुत्र विश्राम-दिवस का भी स्वामी है।”