सामान्य सप्ताह

संत लॉरेन्स ऑफ ब्रिंडिसी, पुरोहित, धर्मसंघी एवं कलीसिया के आचार्य

📒 पहला पाठ: मीकाह 7: 14-15, 18-20

14 तू अपना डण्डा ले कर अपनी प्रजा, अपनी विरासत की भेडें चराने की कृपा कर। वे जंगल और बंजर भूमि में अकेली ही पडी हुई है। प्राचीन काल की तरह उन्हें बाशान तथा गिलआद में चरने दे।

15 जिन दिनों तू हमें मिस्र से निकाल लाया, उन्हीं दिनों की तरह हमें चमत्कार दिखा।

18 तेरे सदृश कौन ऐसा ईश्वर है, जो अपराध हरता और अपनी प्रजा का पाप अनदेखा करता हैं; जो अपना क्रोध बनाये नहीं रखता, बल्कि दया करना चाहता हैं?

19 वह फिर हम पर दया करेगा, हमारे अपराध पैरों तले रौंद देगा और हमारे सभी पाप गहरे समुद्र में फेंकेगा।

20 तू याकूब के लिए अपनी सत्यप्रतिज्ञता और इब्राहीम के लिए अपनी दयालुता प्रदर्शित करेगा, जैसी कि तूने शपथ खा कर हमारे पूर्वजों से प्रतिज्ञा की है।


📘 सुसमाचार : मत्ती 12: 46-50

46 ईसा लोगों को उपदेश दे रहे थे कि उनकी माता और भाई आये वे घर के बाहर थे और उन से मिलना चाहते थे।

47 किसी ने ईसा से कहा, “देखिए, आपकी माता और आपके भाई बाहर हैं। वे आप से मिलना चाहते हैं।”

48 ईसा ने उस से कहा, “कौन है मेरी माता? कौन है मेरे भाई?

49 और हाथ से अपने शिष्यों की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा, “देखो, ये हैं मेरी माता और मेरे भाई!

50 क्योंकि जो मेरे स्वर्गिक पिता की इच्छा पूरी करता है, वही है मेरा भाई, मेरी बहन और मेरी माता।”