छब्बीसवाँ सामान्य सप्ताह
आज के संत: इवाल्ड शहीद


📒पहला पाठ- बारूक 1: 15-22

15 (15-16 आप लोग यह कहेंः हमरा प्रभु-ईश्वर न्यायी है और हम, यहूदिया के लोग, येरूसालेम के निवासी, हमारे राजा और शासक, हमारे याजक और नबी, हमारे पूर्वज- हम सब-के-सब कलंकित हैं;

17 क्योंकि हमने प्रभु के विरुद्ध पाप किया है।

18 हमने उसके आदेशों का पालन नहीं किया और हमने अपने प्रभु-ईश्वर की वाणी पर ध्यान नहीं दिया, जिससे हम उसकी आज्ञाओं के अनुसार आचरण कर सकें, जो प्रभु ने हमें दी थीं।

19 जिस दिन प्रभु हमारे पूर्वजों को मिस्र से निकाल लाया, उस दिन से आज तक हम उसकी आज्ञाएँ भंग करते और उसकी वाणी का तिरस्कार करते आ रहे हैं।

20 इसलिए आज वे विपत्तियाँ और अभिशाप हम पर आ पड़े हैं, जिन्हें प्रभु ने अपने सेवक मूसा द्वारा घोषित किया था, जब वे हमारे पूर्वजों को मिस्र से निकाल कर उस देश में जा रहे थे, जहाँ पहले की तरह आज भी दूध और मधु की नदियाँ बहती हैं।

21 हमने प्रभु द्वारा भेजे हुए नबियों की वाणी पर ध्यान नहीं दिया।

22 हम दुष्टतापूर्वक अपनी राह चलते रहे, पराये देवताओं की उपासना और ऐसे कार्य करते रहे, जो हमारे प्रभु-ईश्वर की दृष्टि में बुरे हैं।


📙सुसमाचार- लूकस 10: 13-16

13 “धिक्कार तुझे, खोराजि़न! धिक्कार तुझे, बेथसाइदा! जो चमत्कार तुम में किये गये हैं, यदि वे तीरुस और सीदोन में किये गये होते, तो उन्होंने न जाने कब से टाट ओढ़ कर और भस्म रमा कर पश्चात्ताप किया होता।

14 इसलिए न्याय के दिन तुम्हारी दशा की अपेक्षा तीरुस और सिदोन की दशा कहीं अधिक सहनीय होगी।

15 और तू, कफ़रनाहूम! क्या तू स्वर्ग तक ऊँचा उठाया जायेगा? नहीं, तू अधोलोक तक नीचे गिरा दिया जायेगा?

16 “जो तुम्हारी सुनता है, वह मेरी सुनता है और जो तुम्हारा तिरस्कार करता है, वह मेरा तिरस्कार करता है। जो मेरा तिरस्कार करता है, वह उसका तिरस्कार करता है, जिसने मुझे भेजा है।”