सामान्य सप्ताह
📒 पहला पाठ: फ़िलिप्पियों 1: 1-11
1 फिलिप्पी में रहने वाले ईसा मसीह के सब सन्तों और उसके अध्यक्षों तथा धर्मसेवकों के नाम ईसा मसीह के सेवक पौलुस और तिमथी का पत्र।
2 हमारा पिता ईश्वर और प्रभु ईसा मसीह आप लोगों को अनुग्रह तथा शान्ति प्रदान करें!
3 जब-जब मैं आप लोगों को याद करता हूँ, तो अपने ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ।
4 मैं हमेशा अपनी हर प्रार्थना में आनन्द के साथ आप सबों के लिए विनती करता हूँ;
5 क्योंकि आप प्रारम्भ से अब तक सुसमाचार के कार्य में सहयोग देते आ रहे हैं।
6 जिसने आप लोगों में यह शुभ कार्य आरम्भ किया, वह उसे ईसा मसीह के आगमन के दिन तक पूर्णता तक पहुँचा देगा। इसका मुझे पक्का विश्वास है।
7 आप सबों के विषय में मेरा यह विचार उचित है- आप मेरे हृदय में बस गये हैं, क्योंकि जब मैं कै़द में हूँ या अदालत में सुसमाचार की सच्चाई का साक्ष्य देता हूँ, तो आप सब मेरे सौभाग्य के सहभागी हो जाते हैं।
8 ईश्वर जानता है कि मैं ईसा मसीह के प्रेम से प्रेरित हो कर आप लोगों को कितना चाहता हूँ।
9 ईश्वर से मेरी प्रार्थना यह है कि आपका प्रेम, ज्ञान तथा हर प्रकार की अन्तर्दृष्टि में, बराबर बढ़ता जाये,
10 जिससे जो श्रेय है, आप उसे पहचानें और प्यार करें। इस तरह आप लोग मसीह के आगमन के दिन पवित्र तथा निर्दोष होंगे।
11 और ईश्वर की महिमा तथा प्रशंसा के लिए ईसा मसीह के द्वारा परिपूर्ण धार्मिकता तक पहुँच जायेंगे।
📘 सुसमाचार :लूकस 14: 1-6
1 ईसा किसी विश्राम के दिन एक प्रमुख फ़रीसी के यहाँ भोजन करने गये। वे लोग उनकी निगरानी कर रहे थे।
2 ईसा ने अपने सामने जलोदर से पीड़ित एक मनुष्य को देख कर
3 शास्त्रियों तथा फ़रीसियों से यह कहा, “विश्राम के दिन चंगा करना उचित है या नहीं?”
4 वे चुप रहे। इस पर ईसा ने जलोदर-पीड़ित का हाथ पकड़ कर उसे अच्छा कर दिया और विदा किया।
5 तब ईसा ने उन से कहा, “यदि तुम्हारा पुत्र या बैल कुएँ में गिर पड़े, तो तुम लोगों में ऐसा कौन है, जो उसे विश्राम के दिन ही तुरन्त बाहर निकाल नहीं लेगा?”
6 और वे ईसा को कोई उत्तर नहीं दे सके।
