आज के संत: रेमंड ऑफ पेनाफोर्ट, पुजारी

📒 पहला पाठ: 1 योहन 4:11-18

11 प्रयि भाइयो! यदि ईश्वर ने हम को इतना प्यार किया, तो हम को भी एक दूसरे को प्यार करना चाहिए।

12 ईश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा। यदि हम एक दूसरे को प्यार करते हैं, तो ईश्वर हम में निवास करता है और ईश्वर के प्रति हमारा प्रेम पूर्णता प्राप्त करता है।

13 यदि वह इस प्रकार हमें अपना आत्मा प्रदान करता है, तो हम जान जाते हैं कि हम उस में और वह हम में निवास करता है।

14 पिता ने अपने पुत्र को संसार के मुक्तिदाता के रूप में भेजा। हमने यह देखा है और हम इसका साक्ष्य देते हैं।

15 जो यह स्वीकार करता है कि ईसा ईश्वर के पुत्र हैं, ईश्वर उस में निवास करता है और वह ईश्वर में।

16 इस प्रकार हम अपने प्रति ईश्वर का प्रेम जान गये और इस में विश्वास करते हैं। ईश्वर प्रेम है और जो प्रेम में दृढ़ रहता है, वह ईश्वर में निवास करता है और ईश्वर उस में।

17 यदि हम पूरे भरोसे के साथ न्याय के दिन की प्रतीक्षा करते हैं, क्योंकि हम इस संसार में मसीह के अनुरूप आचरण करते हैं, तो हमारा प्रेम पूर्णता प्राप्त कर चुका है।

18 प्रेम में भय नहीं होता। पूर्ण प्रेम भय दूर कर देता है, क्योंकि भय में दण्ड की आशंका रहती है और जो डरता है, उसका प्रेम पूर्णता तक नहीं पहुँचा है।

 📘सुसमाचार : मारकुस 6 :45-52

45 इसके तुरन्त बाद ईसा ने अपने शिष्यों को इसके लिए बाध्य किया कि वे नाव पर चढ़ कर उन से पहले उस पार, बेथसाइदा चले जायें; इतने में वे स्वयं लोगों को विदा कर देंगे।

46 ईसा लोगों को विदा कर पहाड़ी पर प्रार्थना करने गये।

47 सन्ध्या हो गयी थी। नाव समुद्र के बीच में थी और ईसा अकेले स्थल पर थे।

48 ईसा ने देखा कि शिष्य बड़े परिश्रम से नाव खे रहे हैं, क्योंकि वायु प्रतिकूल थी; इसलिए वे रात के लगभग चैथे पहर समुद्र पर चलते हुए उनकी ओर आये और उन से कतरा कर आगे बढ़ना चाहते थे।

49 शिष्यों ने उन्हें समुद्र पर चलते देखा। वे उन्हें प्रेत समझ कर चिल्ला उठे,

50 क्योंकि सब-के-सब उन्हें देख कर घबरा गये। ईसा ने तुरन्त उन से कहा, “ढ़ारस रखो, मैं ही हूँ। डरो मत।”

51 तब वे उनके पास आ कर नाव पर चढ़े और वायु थम गयी। शिष्य आश्चर्यचकित रह गये,

52 क्योंकि वे अपनी बुद्धि की जड़ता के कारण रोटियों के चमत्कार का अर्थ नहीं समझ पाये थे।