इकतीसवाँ सामान्य सप्ताह
आज के संत:संत गोदफ्री (शांतिप्रसाद )


📒पहला पाठ-रोमि 16:3-9, 16, 22-27

3  ईसा मसीह में अपने सहयोगी प्रिस्का और आक्विला को नमस्कार,

4  जिन्होंने मेरे प्राण बचाने के लिए अपना सिर दाँव पर रख दिया। मैं ही नहीं, बल्कि गैर-यहूदियों की सब कलीसियाएं उनका आभार मानती हैं।

5  उनके घर में एकत्र होने वाली कलीसिया को नमस्कार। एशिया में मसीह के प्रथम शिष्य अपने प्रिय एपैनेतुस को नमस्कार

6  और मरियम को भी जिसने आप लोगों के लिए इतना कठिन परिश्रम किया।

7  अपने सम्बन्धियों और बन्दीगृह में अपने साथियों अन्द्रोनिकुसा और यूनियास को नमस्कार। ये धर्मप्रचारकों में प्रतिष्ठित हैं और मुझ से पहले मसीह के शिष्य बने थे।

8  प्रभु में अपने प्रिय अमप्लिआतुस को नमस्कार।

9  मसीह में अपने सहयोगी उर्बानुस और अपने प्रिय स्ताखुस को नमस्कार।

16  शान्ति के चुम्बन से एक दूसरे का अभिवादन करें। मसीह की सब कलीसियाएँ आप लोगों को नमस्कार कहती हैं।

22  मैं, तेरतियुस, जिसने यह पत्र लिपिबद्ध किया, प्रभु मैं आप लोगों को नमस्कार करता हूँ

23  मेरा और समस्त कलीसिया का आतिथ्य-सत्कार करने वाला गायुस, इस नगर का कोषाध्यक्ष एरास्तुस और भाई क्वार्तस आप लोगों को नमस्कार कहते हैं।

25 (25-26  सभी राष्ट्र विश्वास की अधीनता स्वीकार करें – उसी उद्देश्य से शाश्वत ईश्वर ने चाहा कि शताब्दियों से गुप्त रखा हुआ रहस्य प्रकट किया जाये और उसने आदेश दिया कि वह रहस्य नबियों के लेखों द्वारा सबों को बता दिया जाये। उसके अनुसार मैं ईसा मसीह का सुसमाचार में सुदृढ़ बना सकता है।

27  उसी एकमात्र सर्वज्ञ ईश्वर की, अनन्त काल तक, ईसा मसीह द्वारा महिमा हो! आमेन!


📙सुसमाचार-लूकस 16: 9-15

9 “और मैं तुम लोगों से कहता हूँ, झूठे धन से अपने लिए मित्र बना लो, जिससे उसके समाप्त हो जाने पर वे परलोक में तुम्हारा स्वागत करें।

10 “जो छोटी-से-छोटी बातों में ईमानदार है, वह बड़ी बातों में भी ईमानदार है और जो छोटी-से-छोटी बातों बेईमान है, वह बड़ी बातों में भी बेईमान है।

11 यदि तुम झूठे धन में ईमानदार नहीं ठहरे, तो तुम्हें सच्चा धन कौन सौंपेगा?

12 और यदि तुम पराये धन में ईमानदार नहीं ठहरे, तो तुम्हें तुम्हारा अपना धन कौन देगा?

13 “क़ोई भी सेवक दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता; क्योंकि वह या तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम करेगा, या एक का आदर और दूसरे का तिरस्कार करेगा। तुम ईश्वर और धन-दोनों क़ी सेवा नहीं कर सकते।”

14 फ़रीसी, जो लोभी थे, ये बातें सुन कर ईसा की हँसी उड़ाते थे।

15 इस पर ईसा ने उन से कहा, “तुम लोग मनुष्यों के सामने तो धर्मी होने का ढोंग रचते हो, परन्तु ईश्वर तुम्हारा हृदय जानता है। जो बात मनुष्यों की दृष्टि में महत्व रखती है, वह ईश्वर की दृष्टि में घृणित है।