ख्रीस्तजयंती काल

📒 पहला पाठ: 1 योहन 5 :5-13

5 संसार का विजयी कौन है? केवल वही, जो यह विश्वास करता है कि ईसा ईश्वर के पुत्र हैं।

6 ईसा मसीह जल और रक्त से आये – न केवल जल से, बल्कि जल और रक्त से। आत्मा इसके विषय में साक्ष्य देता है, क्योंकि आत्मा सत्य है।

7 इस प्रकार ये तीन साक्ष्य देते हैं-

8 आत्मा, जल और रक्त और तीनों एक ही बात कहते हैं।

9 हम मनुष्यों का साक्ष्य स्वीकार करते हैं, किन्तु ईश्वर का साक्ष्य निश्चय ही कहीं अधिक प्रामाणिक है। ईश्वर ने अपने पुत्र के विषय में साक्ष्य दिया है।

10 जो ईश्वर के पुत्र में विश्वास करता है, उसके हृदय में ईश्वर का वह साक्ष्य विद्यमान है। जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता, वह उसे झूठा समझता है; क्योंकि वह पुत्र के विषय में ईश्वर का साक्ष्य स्वीकार नहीं करता

11 और वह साक्ष्य यह है – ईश्वर ने अपने पुत्र द्वारा हमें अनन्त जीवन प्रदान किया है।

12 जिसे पुत्र प्राप्त है, उसे वह जीवन प्राप्त है और जिसे पुत्र प्राप्त नहीं है, उसे वह जीवन प्राप्त नहीं।

13 तुम सभी ईश्वर के पुत्र के नाम में विश्वास करते हो। मैं तुम्हें यह पत्र लिख रहा हूँ, जिससे तुम यह जानो कि तुम्हें अनन्त जीवन प्राप्त है।

 📘सुसमाचार : लूकस 5:12 -16

12 किसी नगर में ईसा के पास एक मनुष्य आया, जिसका शरीर कोढ़ से भरा हुआ था। वह ईसा को देख कर मुँह के बल गिर पड़ा और विनय करते हुए यह बोला, “प्रभु! आप चाहें, तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं।

13 ईसा ने हाथ बढ़ा कर यह कहते हुए उसका स्पर्श किया, “मैं यही चाहता हूँ-शुद्ध जो जाओ”। उसी क्षण उसका कोढ़ दूर हो गया।

14 ईसा ने उसे किसी से कुछ न कहने का आदेश दिया और कहा, “जा कर अपने को याजक को दिखाओ और अपने शुद्धीकरण के लिए मूसा द्वारा निर्धारित भेंट चढ़ाओं, जिससे तुम्हारा स्वास्थ्यलाभ प्रमाणित हो जाये”

15 ईसा की ख्याति बढ़ रहीं थी। भीड़-की-भीड़़ उनका उपदेश सुनने और अपने रोगों से छुटकारा पाने के लिए उनके पास आती थी,

16 और वे अलग जा कर एकान्त स्थानों में प्रार्थना किया करते थे।