पास्का सप्ताह

फातिमा की पवित्र माता मरियम

📒पहला पाठ:1 राजाओं 19:19-21

19 एलियाह वहाँ से चला गया और उसने शाफ़ाट के पुत्र एलीशा के पास पहुँच कर उसे हल जोतते हुए पाया। उसने बारह जोड़ी बैल लगा रखे थे और वह स्वयं बारहवीं जोड़ी चला रहा था। एलियाह ने उसकी बग़ल से गुज़र कर उस पर अपनी चादर डाल दी।

20 एलीशा ने अपने बैल छोड़ कर एलियाह के पीछे दौड़ते हुए कहा, “मुझे पहले अपने माता-पिता का चुम्बन करने दीजिए। तब मैं आपके साथ चलूँगा।”

21 एलियाह ने उत्तर दिया, “जाओ, लौटो। तुम जानते ही हो कि मैंने तुम्होरे साथ क्या किया है।“

22 इस पर एलीशा लौटा। उसने एक जोड़ी बैल मारा, हल की लकड़ी जला कर उनका मांस पकाया और मज़दूरों को खिलाया। मज़दूरों के खाने के बाद एलीशा उठ खड़ा हुआ और एलियाह का नौकर बन कर उसके पीछे हो लिया।


📘सुसमाचार : लूकस 2:41-51

41 ईसा के माता-पिता प्रति वर्ष पास्का पर्व के लिए येरूसालेम जाया करते थे।

42 जब बालक बारह बरस का था, तो वे प्रथा के अनुसार पर्व के लिए येरूसालेम गये।

43 पर्व समाप्त हुआ और वे लौट पडे़; परन्तु बालक ईसा अपने माता-पिता के अनजाने में येरूसालेम में रह गया।

44 वे यह समझ रहे थे कि वह यात्रीदल के साथ है; इसलिए वे एक दिन की यात्रा पूरी करने के बाद ही उसे अपने कुटुम्बियों और परिचितों के बीच ढूँढ़ते रहे।

45 उन्होंने उसे नहीं पाया और वे उसे ढूँढ़ते-ढूँढ़ते येरूसालेम लौटे।

46 तीन दिनों के बाद उन्होंने ईसा को मन्दिर में शास्त्रियों के बीच बैठे, उनकी बातें सुनते और उन से प्रश्न करते पाया।

47 सभी सुनने वाले उसकी बुद्धि और उसके उत्तरों पर चकित रह जाते थे।

48 उसके माता-पिता उसे देख कर अचम्भे में पड़ गये और उसकी माता ने उस से कहा “बेटा! तुमने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? देखो तो, तुम्हारे पिता और मैं दुःखी हो कर तुम को ढूँढते रहे।“

49 उसने अपने माता-पिता से कहा, “मुझे ढूँढ़ने की ज़रूरत क्या थी? क्या आप यह नहीं जानते थे कि मैं निश्चय ही अपने पिता के घर होऊँगा?“

50 परन्तु ईसा का यह कथन उनकी समझ में नहीं आया।

51 ईसा उनके साथ नाज़रेत गये और उनके अधीन रहे। उनकी माता ने इन सब बातों को अपने हृदय में संचित रखा।