सामान्य काल

धन्य कुँवारी मरियम का ऐच्छिक स्मरण


📒पहला पाठ: यूदीत 1:17, 20-25
📘सुसमाचार:मारकुस 11:27-33

27 वे फिर येरुसालेम आये। जब ईसा मन्दिर में टहल रहे थे, तो महायाजक, शास्त्री और नेता उनेक पास आ कर बोले,

28 “आप किस अधिकार से यह सब कर रहे हैं? किसने आप को यह सब करने का अधिकार दिया?“

29 ईसा ने उन्हें उत्तर दिया, “मैं भी आप लोगों से एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ। यदि आप मुझे इसका उत्तर देंगे, तो मैं भी आप को बता दूँगा कि मैं किस अधिकार से यह सब कर रहा हूँ।

30 बताइए, योहन का बपतिस्मा स्वर्ग का था अथवा मनुष्यों का?”

31 वे यह कहते हुए आपस में परामर्श करते थे- “यदि हम कहें, ’स्वर्ग का’, तो वह कहेंगे, ’तब आप लोगों ने उस पर विश्वास क्यों नहीं किया’।

32 यदि हम कहें, “मनुष्यों का, तो….।” वे जनता से डरते थे। क्योंकि सब योहन को नबी मानते थे।

33 इसलिए उन्होंने ईसा को उत्तर दिया, “हम नहीं जानते”। इस पर ईसा ने उन से कहा,“ तब मैं भी आप लोगों को नहीं बताऊँगा कि मैं किस अधिकार से यह सब कर रहा हूँ”।