सामान्य काल का सप्ताह
संत पौलिनुस नोला, धर्माध्यक्ष, संत जॉन फिशर, धर्माध्यक्ष एवं शहीद, संत थॉमस मोर, विवाहित पुरुष एवं शहीद

📒 पहला पाठ 2 इतिहास 17:5-8,13-15,18

5 इसलिए प्रभु ने उसके हाथ में राजसत्ता सुदृढ़ की। समस्त यूदा यहोशाफ़ाट को उपहार देने आया। इस प्रकार उसे बहुत धन-सम्पत्ति और सम्मान मिला।

6 जैसे-जैसे उसे प्रभु के मार्गों पर चलने का उसका साहस बढ़ता गया, वैसे-वैसे वह पहाड़ी पूजास्थान और अशेरा- देवी के खूँटे यूदा से हटाता गया।

7 उसने अपने शासनकाल के तीसरे वर्ष अपने पदाधिकारी बेन-हाइल, ओबद्या, ज़कर्या, नतनएल और मीकायाह को भेजा, जिससे वे यूदा के नगरों में लोगों को शिक्षा प्रदान करें।

8 उनके साथ ये लेवी थे: शमाया, नतन्या, ज़बद्या, असाएल, शमीरामोत, यहोनातान, अदोनीया, टोबीया और टोब- अदोनीया। इन लेवियों के साथ याजक एलीशामा और यहोराम भी थे।

13 यूदा के नगरों में भी भण्डार और येरूसालेम में वीर सैनिक थे।

14 उनके कुटुम्बों के अनुसार उनका क्रम यह था – यूदा से: सहस्रपति मुखिया अदना; उसके साथ तीन लाख वीर योद्धा थे।

15 उसके बाद मुखिया योहानान, जिसके नीचे दो लाख अस्सी हज़ार योद्धा थे। फिर ज़िक्री का पुत्र अमस्या, जिसने स्वेच्छा से अपने आपको प्रभु को समर्पित कर दिया था

18 योज़ाबाद, जिसके नीचे युद्ध के लिए तैयार एक लाख अस्सी हज़ार आदमी थे।


📘सुसमाचार :मत्ती 7:1-5

1 “दोष नहीं लगाओ, जिससे तुम पर भी दोष न लगाया जाये ; क्योंकि

2 जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जायेगा और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिए भी नापा जायेगा।

3 जब तुम्हें अपनी ही आँख की धरन का पता नहीं, तो तुम अपने भाई की आँख का तिनका क्यों देखते हो?

4 जब तुम्हारी ही आँख में धरन है, तो तुम अपने भाई से कैसे कह सकते हो, ‘मैं तुम्हारी आँख का तिनका निकाल दूँ?’

5 रे ढोंगी! पहले अपनी ही आँख की धरन निकालो। तभी अपने भाई की आँख का तिनका निकालने के लिए अच्छी तरह देख सकोगे।