संत डोमिनिक, पुरोहित एवं धर्मसंघ के संस्थापक

📒 पहला पाठ:हबक्कूक 1:12 – 2: 4

12 प्रभु! क्या तू प्राचीन काल से मेरा परमपावन अमत्र्य ईश्वर नहीं है? प्रभु! तूने अपनी दण्डाज्ञा को पूरा करने के लिए उस खल्दैयी जाति को नियुक्त किया है। हमारी चटटान! तूने हमें दण्डित करने के लिए उसे खडा किया है।

13 बुराई तेरी पवित्र आँखों में गडती हैं, अन्याय तुझ से नहीं देखा जाता। तो, तू दुष्टों का विश्वासघात क्यों सहता है? जब वे धमियों को निगल जाते हैं, तो तू यह देख कर क्यों चुप रहता है?

14 तू मनुष्यों के साथ ऐसा व्यवहार करता है, मानों वे समुद्र की मछलियाँ हों अथवा रेंगेने वाले जीव-जन्तु, जिनका कोई स्वामी नहीं।

15 खल्दैयी उन्हें कँटिया से निकलता, जाल से खींच लेता और अपने टोकरे में जमा करता है।

16 तब वह उल्लसित हो कर आनन्द मनाता है, अपने जाल की पूजा करता और अपने टोकरे को धूप चढाता है; क्योंकि इनके सहारे वह श्किार फँसाता और अपनी जीविका चलाता है।

17 क्या वह सदा अपनी तलवार खींच कर निर्दयतापूर्वक राष्ट्रों का वध करता रहेगा?

1 मैं अपनी चैकी पर खड़ा हो जाऊँगा, मैं चारदीवारी पर चढ कर प्रतीक्षा करता रहूँगा कि प्रभु मुझ से क्या कहेगा और मेरी शिकायतों का क्या उत्तर देगा।

2 प्रभु ने उत्तर में मुझ से यह कहा, “जो दृश्य तुम देखने वाले हो, उसे स्पष्ट रूप से पाटियों पर लिखो, जिससे सब उसे सुगमता से पढ सकें;

3 क्योंकि वह भविय का दृश्य है, जो निश्चित समय पर पूरा होने वाला है। यदि उस में देर हो जाये, तो उसकी प्रतीक्षा करते रहो, क्योंकि वह अवश्य ही पूरा हो जायेगा। जो दृष्ट है, वह नष्ट हो जायेगा।

4 जो धर्मी है, वह अपनी धार्मिकता के कारण सुरक्षित रहेगा।


📘 सुसमाचार : मत्ती 17: 14-20

14 जब वे जनसमूह के पास पहुँचे, तो एक मनुष्य आया और ईसा के सामने घुटने टेक कर बोला,

15 “प्रभु! मेरे बेटे पर दया कीजिए। उसे मिरगी का दौरा पड़ा करता है। उसकी हालत बहुत ख़राब है और वह अक्सर आग या पानी में गिर जाता है।

16 मैं उसे आपके शिष्यों के पास लाया, किन्तु वे उसे चंगा नहीं कर सके।” 

17 ईसा ने कहा, “अविश्वासी और दुष्ट पीढ़ी! मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूँ? कब तक तुम्हें सहता रहूँ? उस लड़के को यहाँ ले आओ।” 

18 ईसा ने अपदूत को डांटा और वह लड़के से निकल गया। वह लड़का उसी घड़ी चंगा हो गया।

19 बाद में  शिष्यों ने एकान्त में ईसा के पास आ कर पूछा, “हम लोग उसे क्यों नहीं निकाल सके?”

20 ईसा ने उन से कहा, “अपने विश्वास की कमी के कारण। मैं तुम से यह कहता हूँ- यदि तुम्हारा विश्वास राई के दाने के बराबर भी हो और तुम इस पहाड़ से यह कहो, ‘यहाँ से वहाँ तक हट जा, तो यह हट जायेगा; और तुम्हारे लिए कुछ भी असम्भव नहीं होगा।