धन्य कुँवारी मरियम के स्वर्गारोहण का महापर्व — पूर्वसंध्या प्रार्थना

📒 पहला पाठ:1 इतिहास 15: 3-4, 15-16; 16: 1-2

3 ईश्वर की मंजूषा को उस स्थान पर ले आने के लिए, जिसे उसने उसके लिए तैयार करवाया था दाऊद ने सभी इस्राएलियों को एकत्र किया।

4 दाऊद ने हारून तथा लेवी के पुत्रों को बुला भेजाः

15 मूसा ने प्रभु के आदेशानुसार जैसा कहा था, लेवी वैसे ही डण्डों के सहारे ईश्वर की मंजूषा अपने कन्धों पर उठा कर ले गये।

16 तब दाऊद ने लेवियों के नेताओं को ओदश दिया कि वे अपने बन्धुओं को गायक के रूप में नियुक्त करें, जिससे वे सारंगी, सितार, झाँझ आदि वाद्यों को बजा कर आनन्द का संगीत सुनायें।

1 वे ईश्वर की मंजूषा को ले आये और उसे उस तम्बू में रख दिया, जिसे दाऊद ने उसके लिए खड़ा कर दिया था। उन्होंने ईश्वर को होम तथा शान्ति के बलिदान चढ़ाये।

2 होम तथा शांन्ति के बलिदान चढा़ने के बाद दाऊद ने प्रभु के नाम पर लोगों को आशीर्वाद दिया।


📙 दूसरा पाठ: 1 कुरिन्थियों 15: 54-57

54 जब यह नश्वर शरीर अनश्वरता को धारण करेगा, जब यह मरणशील शरीर अमरता को धारण करेगा, तब धर्मग्रन्थ का यह कथन पूरा हो जायेगा: मृत्यु का विनाश हुआ। विजय प्राप्त हुई।

55 मृत्यु! कहाँ है तेरी विजय? मृत्यु! कहाँ है तेरा दंश?

56 मृत्यु का दंश तो पाप है और पाप को संहिता से बल मिलता है।

57 ईश्वर को धन्यवाद, जो हमारे प्रभु ईसा मसीह द्वारा हमें विजय प्रदान करता है!


📘 सुसमाचार : लूकस 11: 27-28

27 ईसा ये बातें कह ही रहे थे कि भीड़ में से कोई स्त्री उन्हें सम्बोधित करते हुए ऊँचे स्वर में बोल उठी, “धन्य है वह गर्भ, जिसने आप को धारण किया और धन्य हैं वे स्तन, जिनका आपने पान किया है!

28 परन्तु ईसा ने कहा, “ठीक है; किन्तु वे कहीं अधिक धन्य हैं, जो ईश्वर का वचन सुनते और उसका पालन करते हैं”।