आगमन काल का प्रथम रविवार


📒 पहला पाठ: इसायाह 3: 16-17, 19; 64: 2-7

16 प्रभु यह कहता है – “सियोन की पुत्रियाँ घमण्डी हैं। वे सिर उठाये, आँखें मटकाते और घूँगरू छमछमाते, फुदकते हुए आगे बढ़ती हैं।

17 इसलिए प्रभु सियोन की स्त्रियों के सिर पर खाज भेजेगा, वह उनकी खोपड़ी गंजी बना देगा।”

19 बाली, कंकण, दुपट्ठा,


📙 दूसरा पाठ: 1 कुरिन्थियों 1: 3-9

3 हमारा पिता ईश्वर और प्रभु ईसा मसीह आप लोगों को अनुग्रह तथा शान्ति प्रदान करें।

4 आप लोगों को ईसा मसीह द्वारा ईश्वर का अनुग्रह प्राप्त हुआ है। इसके लिए मैं ईश्वर को निरन्तर धन्यवाद देता हूँ।

5 (5-6 मसीह का सन्देश आप लोगों के बीच इस प्रकार दृढ़ हो गया है कि आप लोग मसीह से संयुक्त होकर अभिव्यक्ति और ज्ञान के सब प्रकार के वरदानों से सम्पन्न हो गये हैं।

7 आप लोगों में किसी कृपादान की कमी नहीं है और अब आप हमारे प्रभु ईसा मसीह के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

8 ईश्वर अन्त तक आप लोगों को विश्वास में सुदृढ़ बनाये रखेगा, जिससे आप हमारे प्रभु ईसा मसीह के दिन निर्दोष पाये जायें।

9 ईश्वर सत्यप्रतिज्ञ है। उसी ने आप लोगों को अपने पुत्र हमारे प्रभु ईसा मसीह के सहभागी बनने के लिए बुलाया।


📘 सुसमाचार : मारकुस 13: 33-37

33 “सावधान रहो। जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि वह समय कब आयेगा।

34 यह कुछ ऐसा है, जैसे कोई मनुष्य विदेश चला गया हो। उसने अपना घर छोड़ कर उसका भार अपने नौकरों को सौंप दिया हो, हर एक को उसका काम बता दिया हो और द्वारपाल को जागते रहने का आदेश दिया हो।

35 तुम नहीं जानते कि घर का स्वामी कब आयेगा- शाम को, आधी रात को, मुर्गे के बाँग देते समय या भोर को। इसलिए जागते रहो।

36 कहीं ऐसा न हो कि वह अचानक पहुँच कर, तुम्हें सोता हुआ पाये।

37 जो बात मैं तुम लोगों से कहता हूँ, वही सब से कहता हूँ – जागते रहो।”