संत जुआन डिएगो
📒 पहला पाठ: इसायाह 40: 25-31
25 परमपावन ईश्वर कहता है, “तुम मेरी तुलना किस से करना चाहते हो? मेरी बराबरी कौन कर सकता है?“
26 आकाश की ओर दृष्टि लगाओ। किसने यह सब बनाया है? उसी ने, जो नक्षत्रों का समूह फैलाता और एक-एक का नाम ले कर पुकारता है। उसका सामर्थ्य इतना महान् है और उसका तेज इतना अदम्य कि एक भी नक्षत्र अविद्यमान नहीं रहता।
27 याकूब! तुम यह क्यों कहते हो, इस्राएल! तुम यह क्यों बोलते होः “प्रभु मेरी दुर्दशा पर ध्यान नहीं देता, मेरा ईश्वर मुझे न्याय नहीं दिलाता“?
28 क्या तुम यह नहीं जानते, क्या तुमने यह नहीं सुना कि प्रभु अनादि-अनन्त ईश्वर है, वह समस्त पृथ्वी का सृष्टिकर्ता है? वह कभी क्लान्त अथवा परिश्रन्त नहीं होता। कोई भी उसकी प्रज्ञा की थाह नहीं ले सकता।
29 वह थके-माँदे को बल देता और अशक्त को सँभालता है।
30 जवान भले ही थक कर चूर हो जायें और फिसल कर गिर पड़ें,
31 किन्तु प्रभु पर भरोसा रखने वालों को नयी स्फूर्ति मिलती रहती है। वे गरुड़ की तरह अपने पंख फैलाते हैं; वे दौड़ते रहते हैं, किन्तु थकते नहीं, वे आगे बढ़ते हैं, पर शिथिल नहीं होते।
📘 सुसमाचार : मत्ती 11: 28-30
28 परन्तु ईसा ने कहा, “ठीक है; किन्तु वे कहीं अधिक धन्य हैं, जो ईश्वर का वचन सुनते और उसका पालन करते हैं”।
29 भीड़-की-भीड़ उनके चारों ओर उमड़ रही थी और वे कहने लगे, “यह एक विधर्मी पीढ़ी है। यह एक चिह्न माँगती है, परन्तु नबी योनस के चिह्न को छोड़ इसे और कोई चिह्न नहीं दिया जायेगा।
30 जिस प्रकार योनस निनिवे-निवासियों के लिए एक चिह्न बन गया था, उसी प्रकार मानव पुत्र भी इस पीढ़ी के लिए एक चिह्न बन जायेगा।
