28 may in hindi

सामान्य रविवार

📒पहला पाठ:1पेत्रुस 2:2-5, 9-12

2 (2-3 आप लोगों ने अनुभव किया है कि ईश्वर कितना भला है, इसलिए नवजात शिशुओं की तरह शुद्ध आध्यात्मिक दूध के लिए तरसते रहें, जो मुक्ति प्राप्त करने के लिए आपका पोषण करेगा।

4 प्रभु वह जीवन्त पत्थर हैं, जिसे मनुष्यों ने तो बेकार समझ कर निकाल दिया, किन्तु जो ईश्वर द्वारा चुना हुआ और उसकी दृष्टि में मूल्यवान है।

5 उनके पास आयें और जीवन्त पत्थरों का आध्यात्मिक भवन बनें। इस प्रकार आप पवित्र याजक-वर्ग बन कर ऐसे आध्यात्मिक बलिदान चढ़ा सकेंगे, जो ईसा मसीह द्वारा ईश्वर को ग्राह्य होंगे।

9 परन्तु आप लोग चुने हुए वंश, राजकीय याजक-वर्ग, पवित्र राष्ट्र तथा ईश्वर की निजी प्रजा हैं, जिससे आप उसके महान् कार्यों का बखान करें, जो आप लोगों को अन्धकार से निकाल कर अपनी अलौकिक ज्योति में बुला लाया।

10 पहले आप ’प्रजा नहीं’ थे, अब आप ईश्वर की प्रजा हैं। पहले आप ’कृपा से वंचित’ थे, अब आप उसके कृपापात्र हैं।

11 प्यारे भाइयो! आप परदेशी और प्रवासी हैं, इसलिए मैं आप से अनुरोध करता हूँ कि आप शारीरिक वासनाओं का दमन करें, जो आत्मा के विरुद्ध संघर्ष करती हैं।

12 गैर-मसीहियों के बीच आप लोगों का आचरण निर्दोष हो। इस प्रकार जो अब आप को कुकर्मी कह कर आपकी निन्दा करते हैं, वे आपके सत्कर्मों को देख कर ईश्वर के आगमन के दिन उसकी स्तुति करेंगे।

📘सुसमाचार:मारकुस 10:46-52

46 वे येरीख़ो पहुँचे। जब ईसा अपने शिष्यों तथा एक विशाल जनसमूह के साथ येरीख़ो से निकल रहे थे, तो तिमेउस का बेटा बरतिमेउस, एक अन्धा भिखारी, सड़क के किनारे बैठा हुआ था।

47 जब उसे पता चला कि यह ईसा नाज़री हैं, तो वह पुकार-पुकार कर कहने लगा, “ईसा, दाऊद के पुत्र! मुझ पर दया कीजिए”!

48 बहुत-से लोग उसे चुप करने के लिए डाँटते थे; किन्तु वह और भी जोर से पुकारता रहा, “दाऊद के पुत्र! मुझ पर दया कीजिए”।

49 ईसा ने रुक कर कहा, “उसे बुलाओ”। लोगों ने यह कहते हुए अन्धे को बुलाया, “ढ़ारस रखो। उठो! वे तुम्हें बुला रहे हैं।”

50 वह अपनी चादर फेंक कर उछल पड़ा और ईसा के पास आया।

51 ईसा ने उस से पूछा, “क्या चाहते हो? मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ?” अन्धे ने उत्तर दिया, “गुरुवर! मैं फिर देख सकूँ”।

52 ईसा ने कहा, “जाओ, तुम्हारे विश्वास ने तुम्हारा उद्धार किया है”। उसी क्षण उसकी दृष्टि लौट आयी और वह मार्ग में ईसा के पीछे हो लिया।

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