26 may in hindi

संत फिलिप नेरी, पुरोहित — अनिवार्य स्मृति

📒 पहला पाठ:2 राजाओं 25:1-12

1  सिदकीया के राज्यकाल के नौवें वर्ष, दसवें महीने के दसवें दिन, बाबुल का राजा नबूकदनेज़र अपनी समस्त सेना के साथ येरूसालेम पर आक्रमण करने आया। उसने नगर के सामने शिविर डाला और उसे चारों ओर से घेर लिया।

2  यह घेराबन्दी सिदकीया के राज्यकाल के दसवें वर्ष तक बनी रही।

3 (3-4  उस वर्ष के चैथे महीने के नौवें दिन नगर की चारदीवारी में दरार की गयी; क्योंकि नगर में अकाल पड़ा था और खाने के लिए लोगों के पास कुछ नहीं रह गया था। यद्यपि खल्दैयी नगर के चारों ओर पड़े हुए थे, फिर भी सब सैनिक राजकीय उद्यान के पास की दो दीवारों के बीच वाले फ़ाटक से, रात को, नगर से बाहर निकले और अराबा की ओर भाग गये।

5  खल्दैयियो की सेना ने राजा का पीछा किया और उसे येरीख़ो के मैदान में घेर लिया। उस समय तक उसकी सारी सेना तितर-बितर हो गयी थी।

6  खल्दैयियों ने राजा को पकड़ कर रिबला में बाबुल के राज के सामने उपस्थित किया। वहाँ नबूकदनेज़र ने सिदकीया को दण्डाज्ञा दी।

7  और उसके पुत्रों को अपने सामने मरवा डाला। इसके बाद उसने सिदकीया की आँखें निकलीं और उसे काँसे की बेड़ियों से बाँध कर बाबुल भेज दिया।

8  बाबुल के राजा नबूकदनेज़र के राज्य-काल के उन्नीसवें वर्ष, पाँचवें महीने के सातवें दिन, बाबुल के राजा के सेनापति और उसके अंगरक्षकों के नायक नबूज़र अदान ने येरूसालेम में प्रवेश किया।

9  उसने प्रभु का मन्दिर, राजा का महल और येरूसालेम के सब घर जला दिये। उसने येरूसालेम के सब बडे़ भवन भस्म कर दिये।

10  अंगरक्षकों के नायक के साथ जो खल्दैयी सेना आयी थी, उसने येरूसालेम की चारदीवारी गिरा दी।

11  नगर में जो निवासी रह गये थे, जो लोग बाबुल के राजा के समर्थक बन गये थे और जो भी कारीगर शेष रह गये थे, उन सबों को अंगरक्षकों के नायक नबूज़रअदान ने निर्वासित किया।

12  उसने दाखबारियों और खेतों में काम करने लिए जनसाधारण के कुछ ही लोगों को छोड़ दिया।


📘सुसमाचार :मत्ती 8:1-4

1 ईसा पहाड़ी से उतरे। एक विशाल जनसमूह उनके पीछे हो लिया।

2 उस समय एक कोढ़ी उनके पास आया और उसने यह कहते हुए उन्हें दण्डवत् किया, ”प्रभु! आप चाहें, तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं”।

3 ईसा ने हाथ बढ़ा कर यह कहते हुए उसका स्पर्श किया, ”मैं यही चाहता हूँ- शुद्ध हो जाओ”। उसी क्षण उसका कोढ़ दूर हो गया।

4 ईसा ने उस से कहा, ”सावधान! किसी से कुछ न कहो। जा कर अपने को याजक को दिखाओ और मूसा द्वारा निर्धारित भेंट चढ़ाओ जिससे तुम्हारा स्वास्थ्यलाभ प्रमाणित हो जाये।”

5 ईसा कफ़रनाहूम में प्रवेश कर ही रहे थे कि एक शतपति उनके पास आया और उसने उन से यह निवेदन किया,

6 “प्रभु! मेरा नौकर घर में पड़ा हुआ है। उसे लक़वा हो गया है और वह घोर पीड़ा सह रहा है।”

7 ईसा ने उस से कहा, ”मैं आ कर उसे चंगा कर दूँगा”।

8 शतपति ने उत्तर दिया, ”प्रभु! मैं इस योग्य नहीं हूँ कि आप मेरे यहाँ आयें। आप एक ही शब्द कह दीजिए और मेरा नौकर चंगा हो जायेगा।

9 मैं एक छोटा-सा अधिकारी हूँ। मेरे अधीन सिपाही रहते हैं। जब मैं एक से कहता हूँ- ‘जाओ’, तो वह जाता है और दूसरे से- ‘आओ’, तो वह आता है और अपने नौकर से- ‘यह करो’, तो वह यह करता है।”

10 ईसा यह सुन कर चकित हो गये और उन्होंने अपने पीछे आने वालों से कहा, ”मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ-इस्राएल में भी मैंने किसी में इतना दृढ़ विश्वास नहीं पाया”।

11 ”मैं तुम से कहता हूँ- बहुत-से लोग पूर्व और पश्चिम से आ कर इब्राहीम, इसहाक और याकूब के साथ स्वर्गराज के भोज में सम्मिलित होंगे,

12 परन्तु राज्य की प्रजा को बाहर, अन्धकार में फेंक दिया जायेगा। वहाँ वे लोग रोयेंगे और दाँत पीसते रहेंगे।”

13 शतपति से ईसा ने कहा, ”जाइए आपने जैसा विश्वास किया, वैसा ही हो जाये” और उस घड़ी उसका नौकर चंगा हो गया।

14 पेत्रुस के घर पहुँचने पर ईसा को पता चला कि पेत्रुस की सास बुख़ार में पड़ी हुई है।

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